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मध्यप्रदेश की पावन धरा पर उज्जैन के लाल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का व्यक्तित्व एक कुशल राजनेता, प्रखर विद्वान और दूरदर्शी प्रशासक का अद्भुत संगम है। 25 मार्च को उनके जन्मदिवस के अवसर पर, मध्यप्रदेश एक ऐसे दौर में है जहाँ परंपरा और आधुनिकता का सामंजस्य बिठाते हुए विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। एक छात्र नेता से सूबे के मुख्यमंत्री तक का उनका सफर उनकी कर्मठता और जन-कल्याण के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
कैबिनेट के साथियों का सहयोग और टीम वर्क
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्य करने की शैली ‘सामूहिक नेतृत्व’ पर आधारित है। अपनी कैबिनेट के वरिष्ठ और युवा साथियों के साथ तालमेल बिठाकर उन्होंने शासन में पारदर्शिता और गतिशीलता ला दी है। उनका मानना है कि मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए विभाग दर विभाग समन्वय आवश्यक है, जिससे जनहितकारी योजनाओं का लाभ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की शिक्षा अनुरूप अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँच सके।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान और गौरव की पुनर्स्थापना
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। श्री महाकाल महालोक के विस्तारीकरण के द्वितीय चरण के कार्यों को उन्होंने गति दी है, जिससे उज्जैन न केवल धार्मिक बल्कि वैश्विक पर्यटन का केंद्र बन गया है। भारतीय कालगणना और सम्राट विक्रमादित्य के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए विक्रमोत्सव को विश्व स्तरीय स्वरूप प्रदान करना उनकी सांस्कृतिक दूरदर्शिता का प्रमाण है।श्री कृष्ण पाथेय,श्री पशुपतिनाथ लोक से प्रदेश में धार्मिक तीर्थाटन से स्थानीय विकास को गति प्रदान की जा रही है।
सिंहस्थ 2028: विश्व स्तरीय आयोजन की संकल्पना
आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। उनकी संकल्पना है कि उज्जैन का सिंहस्थ अब तक का सबसे भव्य, सुविधायुक्त और डिजिटल तकनीक से लैस आयोजन बने,जिससे सनातन संस्कृति के वैभव को वैश्विक पटल पर एक नवीन पहचान मिल सके। इसके लिए आधारभूत संरचना, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यापक बजट से व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।
नदी संरक्षण: मां क्षिप्रा का कायाकल्प और जल संवर्धन
मुख्यमंत्री का अपनी मातृभूमि और जीवनदायिनी क्षिप्रा के प्रति विशेष लगाव है।
क्षिप्रा नदी विकास- नदी को स्वच्छ,अविरल और निर्मल बनाने के लिए कान्ह नदी के पानी को कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना से डायवर्ट कर निर्मल बनाने का कार्य तेजी से हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ यादव की परिकल्पना सिंहस्थ 2028 में शिप्रा में शिप्रा के जल से स्नान को साकार करती सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना का विकास तेजी से किया जा रहा है।
शिप्रा रिवर फ्रंट विकास- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना को साकार कर बनाया गया अहमदाबाद के साबरमती की तर्ज पर क्षिप्रा के तटों को ‘रिवर फ्रंट’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य भी निखरे।
जल संवर्धन-पूरे प्रदेश में जल संरचनाओं के संरक्षण और भू-जल स्तर सुधारने के लिए उन्होंने विशेष अभियान चलाए हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को जल संकट से बचाया जा सके।
किसान, वनवासी और औद्योगिक विकास,त्रिकोणीय प्रगति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है:
किसान कल्याण-केंद्र की ‘किसान सम्मान निधि’ के साथ प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाकर राज्य की ओर कृषकों को अतिरिक्त लाभ और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बोनस देकर किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की जा रही है।
वनवासी कल्याण- आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ ‘पेसा एक्ट’ के प्रभावी क्रियान्वयन और पीएम मित्रा पार्क वनवासी अंचलों में विकास कर और वनवासियों भाइयों बहनों की संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
औद्योगिक विकास-प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए ‘रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों के माध्यम से वे उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहे हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ‘विकसित प्रदेश’ बनने की दिशा में अग्रसर है। उनकी उच्च शैक्षणिक योग्यता (PhD, MBA) उनकी कार्यप्रणाली में स्पष्ट झलकती है, जहाँ वे तर्कों और तथ्यों के साथ प्रदेश के हित में कड़े निर्णय लेने से नहीं हिचकिचाते।
लेखक: डॉ सुशील शर्मा / कपिल मिश्रा