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गंजबासौदा (ओमप्रकाश चौरसिया)। बहुप्रतीक्षित रिंग रोड परियोजना भूमि अधिग्रहण की धीमी प्रक्रिया के कारण बुरी तरह अटक गई है। करीब एक साल बीत जाने के बाद भी भू-अर्जन के प्रकरण पूरे नहीं हो सके हैं। इससे अब तक अवॉर्ड पारित नहीं हो पाया। नतीजतन किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका। कई जगहों पर निर्माण कार्य पूरी तरह ठप है। स्थिति यह है कि ठेकेदार को जितना सामग्री-आधारित कार्य सौंपा गया था, वह पूरा हो चुका है। आगे का काम शुरू न होने से मशीनरी और कर्मचारी कर्मच निष्क्रिय बैठे हैं। रिंग रोड का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार किया गया था। तकनीकी खामियों के चलते परियोजना दो हिस्सों में बंट गई।
वर्तमान में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से 23 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण स्वीकृत है। निर्धारित एजेंसी द्वारा कई स्थानों पर जल निकासी के लिए पाइप पुलियों का निर्माण किया जा चुका है। ग्राम महागौर के पास पाराशरी नदी पर पुलिया निर्माण जारी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर कार्य टुकड़ों में ही सिमटा हुआ है। अर्थबेस और सीआरएम का काम अधूरा पड़ा है। वजह साफ है, जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी है, उन्होंने मुआवजा मिलने से पहले काम शुरू करने से साफ इनकार कर दिया है। जब तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज नहीं होती, तब तक रिंग रोड परियोजना की रफ्तार लौटना मुश्किल है। देरी का खामियाजा किसानों, ठेकेदार और आम जनता, तीनों को भुगतना पड़ रहा है।
500 खातेदारों की जमीन प्रक्रिया में फंसी
इस परियोजना के लिए त्योंदा रोड, जीवाजीपुर, सेमरा महागौर, पचमा, चौरावर और रजौदा सहित कई गांवों की जमीन चिन्हित की गई है। कुल मिलाकर करीब 500 खातेदारों के प्रकरण बनाए गए हैं। हालांकि कुछ मामलों में कार्रवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रकरण अब भी जांच और प्रक्रिया के बीच अटके हैं। जब तक सभी मामलों का निराकरण नहीं होता, तब तक अवॉर्ड पारित होना संभव नहीं है।
ठेकेदार पर बढ़ता आर्थिक दबाव
निर्माण एजेंसी के सामने अब नई चुनौती खड़ी हो गई है। उसे दिया गया मटेरियल-आधारित लक्ष्य पूरा हो चुका है। भूमि विवादों के कारण आगे काम नहीं बढ़ पा रहा। इससे मशीनें और मजदूर खाली बैठे हैं। उनका खर्च जारी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो ठेकेदार काम बीच में छोड़ सकता है। इससे परियोजना लंबे समय तक लटक सकती है।
निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल
चौरावर क्षेत्र में क्रेसरों से निकाले गए ओवरबर्डन का उपयोग सड़क के निर्माण में किया जा रहा है। हालांकि गर्मी के सीजन में पानी की कमी और पर्याप्त सिंचाई (तलाई) नहीं होने के कारण कई जगह बेस में दरारें नजर आने लगी हैं। यह निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
ठेकेदार का कोई आवेदन नहीं मिला
भूमि अर्जन की प्रक्रिया अभी जारी है। इसके पूरा होने के बाद ही अवॉर्ड पारित किया जाएगा। किसानों को मुआवजा मिल सकेगा। फिलहाल ठेकेदार की ओर से कोई आपत्ति या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
आर के सिंघई, वरिष्ठ उपयंत्री, लोक निर्माण विभाग, गंजबासौदा।