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वृंदावन का मोर नृत्य, शिव का तांडव, काशी की मसान होली, राम के स्वागत में उमड़ी भक्ति
गंजबासौदा(ओमप्रकाश चौरसिया)। श्री रामनवमी का उत्सव केवल मंदिरों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि श्रद्धा और आस्था का उल्लास पूरे नगर में दिखाई दिया। सड़कों से लेकर गलियों मंदिरों तक और पूरा है। नगर राममय दिखाई दिया। पुलिस प्रशासन पूरी से तरह से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर चौकन्ना रहा। राम जन्मोत्सव को लेकर नगर में या दो अलग- अलग शोभायात्राएं निकली। शुभया यात्रा का सबसे बड़ा स्वरूप रघुवंशी समाज द्वारा रघुकुल युवा परिषद एवं श्री राम जन्म उत्सव ए समिति के तत्वाधान में निकली शोभा यात्रा ने आस्था श्रद्धा और उल्लास को और भी दुगना कर दिया।

रघुवंशी समाज की ओर से नौलखी मंदिर में छप्पन भोग भी लगवाया गया और पूरी देव प्रतिमाओं को नए वस्त्र धारण कराए गए। शोभा यात्रा में साकेतवासी जगनाथ दास महाराज एवं साकेतवासी कनक बिहारी दास महाराज के चित्र सवार रथ साथ-साथ चल रहे थे। जबकि एक रथ पर भगवान सीताराम जी का स्वरूप में बच्चे सच कर बैठे थे एक झांकी में भगवान राम लाल अयोध्या की प्रतिमा सजी हुई थी जो सबसे पीछे चल रही थी जहां प्रसादी का वितरण शोभायात्रा में किया जा रहा था। अखाड़े के कलाकार एक से बढ़कर एक करतब दिखाकर चल रहे थे। शोभा यात्रा में विधायक हरि सिंह रघुवंशी, जनपद अध्यक्ष नीतू देवेंद्र सिंह रघुवंशी, पूजन पादरी अध्यक्ष प्रहलाद सिंह रघुवंशी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे। मालूम हो कि शाम श्री राम जन्मोत्सव की नगर ने केवल एक शोभायात्रा न नहीं देखी, बल्कि आस्था, श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का जीवंत अनुभव किया।
काशी से आए कलाकारों ने बांधा समां
पहली बार नगर पहुंचे काशी के कलाकारों ने शोभायात्रा को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। जैसे ही उनकी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां शुरू हुई, माहौल केवल उत्सव का नहीं रहा वह अनुभव बन गया। वृंदावन का मोर नृत्य जहां मन में माधुर्य घोल रहा था, वहीं शिव का तांडव नृत्य ऊर्जा और भक्ति का कंपन पैदा कर रहा था और जब काशी की मसान होली सामने आई, तो लगा मानो जीवन, मृत्यु, भक्ति और विरक्ति एक साथ उपस्थित हो गए हों। लोग रुक गए, भीड़ ठहर गई और हर कोई उस क्षण को जीने लगा। शोभायात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, हर चौराहा एक नया दृश्य बनता गया। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नतमस्तक हुए।
हनुमान मंदिर से शुरू हुई यात्रा, उत्सव के समापन पर मातृशक्ति का सम्मान
त्योंदा रोड स्थित हनुमान मंदिर से आरंभ हुई राम जन्मोत्सव की शोभायात्रा में जय श्रीराम के उद्घोष के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। काशी से पहली बार आए कलाकारों ने वृंदावन के मोर नृत्य, शिव के तांडव और काशी की मसान होली जैसी प्रस्तुतियों से ऐसा दिव्य भाव रचा कि हर चौराहा एक आध्यात्मिक केंद्र में बदल गया। इस धार्मिक आयोजन का सबसे भावपूर्ण पक्ष यह रहा, चैत्र नवरात्रि उत्सव के समापन पर मातृशक्ति का अभिनंदन। रघुवंशी समाज की महिलाएं सिर पर केसरिया ध्वज बांधे, मर्यादा और अनुशासन के साथ जब सबसे आगे बढ़ीं, तो यह केवल शोभायात्रा का हिस्सा नहीं, बल्कि शक्ति स्वरूपा नारी के सम्मान और सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति बन गया। उनके पीछे विभिन्न समाजों के लोग एक साथ श्रद्धा के साथ चलते नजर आए। मार्ग में जगह-जगह धार्मिक सामाजिक संगठनों द्वारा की गई पुष्पवर्षा, स्वागत द्वार और जयघोषों के बीच यह शोभायात्रा केवल आगे नहीं बढ़ रही थी।
शोभायात्रा के स्वागत में दिखी सनातन एकता
नगर के विभिन्न समाजों, व्यापारियों और संगठनों द्वारा राम जी की शोभायात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया। प्रबुद्धजन, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और राम जन्मोत्सव की बधाइयां दीं। केसरिया ध्वज, पुष्पवर्षा और जयघोषों के बीच भजन मंडलियों की स्वर लहरियां, ढपलों की थाप, बैंड-बाजों की गूंज सब मिलकर ऐसा वातावरण बना रहे थे, जिसमें हर व्यक्ति खुद को भक्ति में डूबा हुआ महसूस कर रहा था। करीब 2 किलोमीटर की इस यात्रा को पूरी दूरी तय करने में 6 घंटे लगे। रात करीब 9 बजे शोभायात्रा रघुवंशी धर्मशाला पहुंची, जहां काशी की गंगा आरती की तर्ज पर भगवान श्रीराम की भव्य आरती की गई।