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गंजबासौदा (ओमप्रकाश चौरसिया)। कृषि विभाग की परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में रासायनिक खेती के खतरों पर खुलकर चिंता जताई गई। विधायक हरि सिंह रघुवंशी ने दो टूक कहा कि रासायनिक खेती के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में हर किसान को अपने खेत का कुछ हिस्सा जैविक खेती के लिए सुरक्षित रखना ही होगा। और कैंसर जैसी बीमारी से बचाना है तो जैविक खेती अपनाना होगी। बरेठ रोड प्लाजा में आयोजित इस कार्यशाला में सिरोंज और गंजबासौदा तहसील के करीब 180 किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती तकनीकों से जोड़ना था।
प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से जैविक उत्पादन को बढ़ावा देना भी लक्ष्य रहा। कृषि स्थायी समिति के अध्यक्ष लखन सिंह रघुवंशी ने गोवंश पालन को खेती की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद और दवाइयां न केवल उत्पादन बढ़ाती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी सुधारती हैं।
वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी
कार्यशाला में कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. विनोद गर्ग, कीट वैज्ञानिक डॉ. योगेश पटेल और कृषि वैज्ञानिक डॉ. सतीश शर्मा ने किसानों को परंपरागत कृषि तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी। वहीं कृषि विभाग के उप संचालक के. एस. खपेडिया ने विभागीय योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने किसानों से नरवाई प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
नरवाई न जलाने की शपथ भी दिलाई
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित किसानों को नरवाई न जलाने की शपथ भी दिलाई गई। अधिकारियों ने चेताया कि इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। ईश एग्रीटेक के जिला प्रतिनिधि जैन ने वीडियो और पीपीटी के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन जिला सलाहकार डॉ. डी.के. तिवारी ने किया। अंत में प्रश्नोत्तरी के माध्यम से किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। सही उत्तर देने वालों को पुरस्कृत भी किया गया।