सिंहस्थ 2028 : सशक्त, पारदर्शी, विधिसम्मत, संवेदनशील, व्यवहारिक मेला अधिनियम की दरकार है। - Samacharline.com
उज्जैनमध्य प्रदेशहोम

सिंहस्थ 2028 : सशक्त, पारदर्शी, विधिसम्मत, संवेदनशील, व्यवहारिक मेला अधिनियम की दरकार है।

उज्जैन। सिंहस्थ महापर्व 2028 के लिए जो अधोसंरचना के कार्य किए जा रहे है,या सड़को के निर्माण एवम चौड़ीकरण को लेकर जो जमीनी स्तर पर चुनोतियाँ सामने आ रही है उनका एकमात्र हल एक विधिसम्मत,परिपूर्ण सिंहस्थ मेला अधिनियम ही है।

50 के दशक में बना मेला अधिनियम बहुत संकुचित हैं उसमें मेले की सभी जरूरते पूरी करने के प्रावधान नही है। मेले को एक सशक्त और विधिसम्मत अधिनियम की दरकार है।

मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता सिंहस्थ है,उसका सारा फोकस सिंहस्थ पर है,लगभग 3 हजार करोड़ के काम स्वीकृत है और कई कार्य प्रचलन में है। इस स्थिति में कई कार्यो में न्यायालीन हस्तक्षेप भी हो रहा है,सबसे जरूरी कार्यो पर स्टे आ रहे है,मेला अधिनियम कानूनी रूप से मेला सम्बन्धी कार्यो को संरक्षण प्रदान नही कर पा रहा हैं। कुछ समय पूर्व सिंहस्थ मेला क्षेत्र के निर्धारण और लेंड पुलिंग योजना को लेकर सरकार की किरकिरी हो चुकी है,उसे अपने कदम वापस लेना पड़े है।

जानकर सूत्रों के अनुसार सिंहस्थ क्षेत्र विकास योजना नगर विकास योजना के अंतर्गत क्रियान्वयन होनी थी,लेकिन उसके ड्राप्ट में कमियां थी उसका फायदा उठाकर सरकार पर भारतीय किसान संघ और अन्य प्रभावितों ने ऐसा दबाब बनाया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा। इस योजना का प्रारूप भूमि सुधार आयोग ने बनाया था। इस आयोग में बैठे पूर्व नौकरशाहों ने मानवीय पक्ष को दरकिनार कर राजस्व की क्रूरता को अधिक महत्व दिया इस योजना का फेस ही जनविरोधी हो गया था। जबकि उज्जैन और सिंहस्थ के विकास के यह योजना वरदान साबित होती। उज्जैन एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का तीर्थ शहर विकसित होता।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को चाहिए कि वे उज्जैन को जानने,समझने वाले गणमान्य व्यक्तियों से साथ यहाँ पदस्थ रहे संवेदनशील अधिकारियों की टीम बनाकर नया सिंहस्थ अधिनियम बनाए जिसमे विधिसम्मत कार्यो को संरक्षण मिले, प्रभावितों के लिए वैकल्पिक योजना हो,अस्थायी व्यवस्था के लिए प्रावधान हो,जितने भी विभाग सिंहस्थ में काम करते है उन सभी पर यह अधिनियम वित्तीय और प्रशासनिक रुप से एक निश्चित समयावधि में लागू हो।

एक परिपक्व, विधिसम्मत, जनसरोकारों से युक्त और उज्जैन के किसानो,व्यापारियों, नागरिकों के लिए अनुकूल,देश दुनिया से आने वाले साधु,संतो श्रद्धालुओं के किए सुविधाओं से लैस प्रशासन के लिए जरूरत अनुसार कठोर और व्यवहारिक रूप से लचीला अधिनियम बनाए जाने की दरकार है।

हम इस विषय पर विजनरी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से उम्मीद भी कर सकते है

-प्रकाश त्रिवेदी