"तीन दिवसीय डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला" उपहास, उपेक्षा और विरोध से गुजरकर आज स्वीकार्यता के शिखर पर पहुंचा संघ- रामदत्त जी चक्रधर - Samacharline.com
उज्जैनमध्य प्रदेशहोम

“तीन दिवसीय डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला” उपहास, उपेक्षा और विरोध से गुजरकर आज स्वीकार्यता के शिखर पर पहुंचा संघ- रामदत्त जी चक्रधर

उज्जैन। डॉ. हेडगेवार जन्म शताब्दी स्मृति सेवा न्यास के प्रकल्प अंतर्गत आयोजित डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला-2026 का शुभारंभ शुक्रवार रात्रि लोकमान्य तिलक विद्यालय, नीलगंगा रोड, माधव नगर में हुआ। 10 से 12 अप्रैल तक आयोजित यह तीन दिवसीय व्याख्यानमाला अपने 40वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। प्रथम दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मा. सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त जी चक्रधर ने “100 वर्ष की संघ यात्रा” विषय पर विस्तृत उद्बोधन देते हुए कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विश्व को ज्ञान, आचार और व्यवहार की दिशा देने वाली ऋषि-भूमि रहा है। उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा साधारण नहीं, बल्कि उपहास, उपेक्षा, आलोचना, विरोध और प्रतिबंधों से गुजरते हुए आज व्यापक स्वीकार्यता तक पहुंची एक असामान्य यात्रा है। कार्यक्रम में शहर के बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। प्रतिदिन रात्रि 8.30 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय विषयों पर प्रबुद्ध वक्ताओं के व्याख्यान होंगे।

दीप प्रज्ज्वलन, केशव अर्चना और गीत प्रस्तुति के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ, जिसके पश्चात केशव अर्चना प्रस्तुत की गई। अतिथियों का परिचय क्षमाशील जी मिश्रा ने कराया, जबकि स्वागत उल्लास जी वैद्य, प्रशांत जी शर्मा ने अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान गीत प्रस्तुति सार्थक गहलोत द्वारा दी गई, वहीं वंदे मातरम् की प्रस्तुति अनामिका सोनी ने वातावरण को राष्ट्रभाव से ओतप्रोत कर दिया। मंच संचालन राहुल विपट ने किया तथा अंत में राजेश गर्ग द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

भारत की वैचारिक विरासत और संघ की 100 वर्ष की यात्रा

मुख्य वक्ता श्री रामदत्त जी चक्रधर ने अपने उद्बोधन में भारतवर्ष की सांस्कृतिक और वैचारिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वही भूमि है जिसने विश्व को ज्ञान, आचार, व्यापार और व्यवहार की दिशा दी है। उन्होंने कहा कि ऐसा पुरातन देश कोई विश्व में दूसरा नहीं है और भारत को पुनः उसी गौरवशाली स्वरूप में स्थापित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा पिछले 100 वर्षों से निरंतर चल रही है। उन्होंने कहा कि 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा प्रारंभ किए गए इस कार्य को प्रारंभिक समय में उपहास और उपेक्षा का सामना करना पड़ा। लोगों ने इसे असंभव कार्य बताया, किंतु संघ रुका नहीं और निरंतर आगे बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि आज यह यात्रा व्यापक जनस्वीकार्यता के चरण में पहुंच चुकी है और लाखों स्वयंसेवक इसके साथ जुड़े हैं।

विरोध, प्रतिबंध और साहस के बीच आगे बढ़ता संगठन

अपने वक्तव्य में उन्होंने संघ के इतिहास के संघर्षपूर्ण चरणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के आरोपों के बाद संघ को कठोर विरोध और प्रतिबंध का सामना करना पड़ा, किंतु जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि संघ का इससे कोई संबंध नहीं था। इसके बाद भी स्वयंसेवकों ने देशव्यापी सत्याग्रह कर जेल यात्राएं कीं और संगठन का कार्य पुनः प्रारंभ हुआ। इसी प्रकार 1975 के आपातकाल के दौरान भी हजारों कार्यकर्ता जेल गए, लेकिन संगठन का कार्य रुका नहीं। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके साहस, निर्भीकता और राष्ट्रनिष्ठा को संघ की मूल प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार के जीवन में साहस का गुण हर स्तर पर दिखाई देता है और यही संघ कार्य की मूल चेतना है।

आज “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व” विषय पर होगा व्याख्यान

व्याख्यानमाला के दूसरे दिवस 11 अप्रैल, शनिवार को मा. प्रांत संघचालक, मध्य भारत प्रांत, श्री अशोक जी पांडेय “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व” विषय पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुधीर गवारिकर करेंगे। व्याख्यानमाला समिति के अध्यक्ष नितिन गरुड़ एवं सचिव गोपाल गुप्ता ने शहरवासियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर इस वैचारिक आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।