मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में “गुरु पूर्णिमा महोत्सव” पर सांदीपनि अलंकरण समारोह उज्जैन में 29 जुलाई को
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य...
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा...
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मंडी गोबिंदगढ़ (पंजाब): राष्ट्रीय सामाजिक विकास प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, देश भगत विश्वविद्यालय (डीबीयू) ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (एनआईएसडी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह रणनीतिक सहयोग समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तिकरण तथा समुदाय-आधारित विकास पहलों को देशभर में आगे बढ़ाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस समझौते पर औपचारिक रूप से देश भगत विश्वविद्यालय के माननीय अध्यक्ष डॉ. संदीप सिंह तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक गौरव राजावत द्वारा चंडीगढ़ में आयोजित चिंतन शिविर के दौरान हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर पंजाब के माननीय राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता के माननीय केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार तथा राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा, श्री सुखविंदर सिंह बिंद्रा, सदस्य, एनआईएसडी एवं विशेष सदस्य, एनसीसीडीआर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (भारत सरकार) सहित देशभर के अन्य गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
यह साझेदारी राष्ट्रीय मिशनों और सामाजिक प्राथमिकताओं के अनुरूप सहयोगात्मक कार्यक्रमों, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा जनसंपर्क पहलों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है। समझौते के प्रमुख क्षेत्रों में “शिक्षित भारत” के अंतर्गत शिक्षा-आधारित सशक्तिकरण, “समृद्ध भारत” के माध्यम से आर्थिक उन्नयन तथा “नशा मुक्त भारत” के अंतर्गत जागरूकता और पुनर्वास प्रयासों को सुदृढ़ करना शामिल है।
इस सहयोग के अंतर्गत क्षमता निर्माण, कौशल विकास तथा सामुदायिक सहभागिता पर विशेष बल दिया जाएगा, विशेषकर समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के लिए।
इस साझेदारी के माध्यम से देश भगत विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमता तथा जनसंपर्क नेटवर्क का सक्रिय योगदान देगा, जिससे प्रमाण-आधारित नीति निर्माण तथा सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को समर्थन मिल सके। संयुक्त पहलों में प्रशिक्षण मॉड्यूल, जागरूकता अभियान, क्षेत्रीय हस्तक्षेप तथा प्रभाव-उन्मुख अनुसंधान परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय नेतृत्व ने शिक्षा, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई। यह सहयोग विश्वविद्यालय की उस दृष्टि को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें वह केवल अकादमिक सीमाओं तक सीमित न रहकर एक समावेशी, न्यायसंगत एवं सशक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
यह समझौता “विकसित भारत 2047” के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, जो उच्च शिक्षण संस्थानों की परिवर्तनकारी सामाजिक बदलाव में उत्प्रेरक की भूमिका को सुदृढ़ करता है।