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मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत 8 जून को हरियाणा से सोमनाथ के लिए रवाना होगी विशेष ट्रेन : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़, 11 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना, अटूट आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का अमर प्रतीक है, जिसने हर आक्रमण, हर संघर्ष और हर विपत्ति के बाद राष्ट्र को पुनः खड़े होने की शक्ति दी है।

मुख्यमंत्री सोमवार को कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यातिथि के तौर पर शिरकत कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी को मंदिर कमेटी पदाधिकारियों और संत समाज ने स्मृति चिह्न देकर सम्मानित भी किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और उपस्थित श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित विशेष कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी देखा, जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विशेष पूजा करते हुए अपना संबोधन दिया। श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे साधु संतों का मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शॉल ओढ़ा कर सम्मान भी किया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा यह वर्षभर का राष्ट्रीय पर्व भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक जागरण और सभ्यतागत निरंतरता का प्रतीक है। वैदिक नदियों अरुणाय और सरस्वती के पावन संगम स्थल पर इस पर्व का आयोजन इसकी आध्यात्मिक महत्ता को और अधिक दिव्य बना रहा है। उन्होंने कहा कि यहां स्थित प्राचीन संगमेश्वर मंदिर सदियों से इस पवित्र संगम और भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा का साक्षी रहा है।

मुख्यमंत्री ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व 11 जनवरी से शुरू होकर 11 जनवरी 2027 तक चलेगा। उन्होंने बताया कि देशभर से श्रद्धालु सोमनाथ मंदिर पहुंच रहे हैं तथा हरियाणा से भी मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8 जून को विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली नई वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई वैश्विक पहचान और सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का भव्य निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का सबसे बड़ा प्रतीक बनी। उन्होंने कहा कि उस समय कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा देश राममय हो गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम के पुनर्विकास ने भारत के प्राचीन तीर्थ स्थलों की गरिमा को पुनर्स्थापित किया है तथा आधुनिक भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि चारधाम परियोजना, प्रसाद योजना और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण जैसे प्रयासों के माध्यम से भारत अपनी आध्यात्मिक जड़ों से पुनः जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह नए भारत का वह कालखंड है जहां विकास और विरासत साथ-साथ चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग, आयुर्वेद और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देकर भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने इस दौरान श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर, कुरुक्षेत्र के अनुभव केंद्र का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने विलुप्त हो रही संस्कृति को पहचान दिलाने का काम किया है।