इंदौर का अनूठा यशोदा मंदिर : जहां गोद भराई की रस्म के लिए उमड़ती हैं महिलाएं, जन्माष्टमी के दूसरे दिन और डोल ग्यारस पर लगती है भीड़, मन्नत पूरी होने पर बच्चे के कपड़े से लेकर वजन के बराबर धान तक चढ़ाते हैं श्रद्धालु
अक्षय जैन इंदौर के खजुरी बाजार...
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अक्षय जैन
इंदौर के खजुरी बाजार की संकरी गलियों में स्थित यशोदा मंदिर देशभर में अपनी एक अनूठी धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ गोद भराई की रस्म कराने वाली निःसंतान महिलाओं की मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि जन्माष्टमी के दूसरे दिन और डोल ग्यारस पर मंदिर में सैकड़ों महिलाएं गोद भरने की मन्नत लेकर पहुंचती हैं।
मंदिर से जुड़ी यह परंपरा वर्षों पुरानी बताई जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यशोदा मैया की चौखट पर की गई गोद भराई निष्फल नहीं जाती। मन्नत पूरी होने के बाद परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में मान चढ़ाता है। कोई बच्चे की जोड़ी भर कपड़े अर्पित करता है तो कोई बच्चे के वजन के बराबर धान चढ़ाता है। कई श्रद्धालु बच्चे के लिए बनवाए गए जेवर भी भगवान को समर्पित करते हैं।
तीसरी पीढ़ी निभा रही परंपरा
मंदिर में गोद भराई की यह रस्म दीक्षित परिवार की तीसरी पीढ़ी निभा रही है। परिवार द्वारा विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ गोद भराई की पूजा कराई जाती है। इस दौरान धार्मिक मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाता है। गोद भराई की मुख्य पूजा के समय वहां अन्य लोगों की मौजूदगी की अनुमति नहीं होती। पूजा की यह निजता इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
मन्नत के साथ लौटती हैं महिलाएं
जन्माष्टमी के दूसरे दिन और डोल ग्यारस के अवसर पर मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है। दूर-दूर से महिलाएं यहां पहुंचती हैं। कई महिलाएं पहली बार मन्नत लेकर आती हैं, जबकि कुछ ऐसी भी होती हैं जो अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद धन्यवाद स्वरूप मंदिर में मान चढ़ाने आती हैं।
किसी के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म है तो किसी के लिए वर्षों से संजोया सपना। मंदिर की चौखट पर पहुंचने वाली महिलाओं के चेहरों पर इसी उम्मीद और विश्वास की झलक दिखाई देती है।
आस्था ने बनाई अलग पहचान
यशोदा मंदिर की यह परंपरा अब इंदौर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन चुकी है। यहां होने वाली गोद भराई की रस्म से जुड़ी मान्यताओं के साक्षी शहर ही नहीं, देशभर से आने वाले श्रद्धालु भी हैं।
धर्म और लोकविश्वास की अपनी दुनिया होती है। यहां तर्क से अधिक महत्व उस भरोसे का होता है, जिसे श्रद्धालु वर्षों से अपने भीतर संजोए रखते हैं। खजुरी बाजार का यह यशोदा मंदिर भी उसी लोकआस्था का प्रतीक है, जहां हर साल सैकड़ों महिलाएं एक ही उम्मीद लेकर पहुंचती हैं यशोदा मैया उनकी गोद भी अपने लाल से भर दें।