यूपीआई शुल्क के विरोध में इंदौर के व्यापारियों ने कसी कमर, अहिल्या चेम्बर्स ने बड़ी तादाद में पोस्टर प्रिंट करवाए, 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए जनसमर्थन जुटाने की तैयारी
इंदौर। यूपीआई के माध्यम से होने...
Mumbai is being Rebuilt. India is...
यशस्वी श्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात...

इंदौर। यूपीआई के माध्यम से होने वाले बड़े मर्चेंट लेन-देन पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी शुरू कर दी है। अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने 23 सितंबर के प्रस्तावित ‘नो यूपीआई डे’ के प्रचार-प्रसार के लिए बड़ी तादाद में पोस्टर प्रिंट करवाए हैं। इन पोस्टरों को शहर के विभिन्न बाजारों और दुकानों तक पहुंचाकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है।
अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के संयुक्त सचिव अक्षय जैन ने कहा कि यह अभियान केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूपीआई शुल्क के संभावित असर को आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास होगा। व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान की लागत यदि व्यापारियों पर बढ़ती है तो उसका असर व्यापार की लागत और आगे चलकर कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव शुल्क की अंतिम दर, लागू होने वाली श्रेणियों और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
जैन ने कहा कि 23 सितंबर को ‘नो यूपीआई डे’ के माध्यम से व्यापारियों की सामूहिक आवाज शासन और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाई जाएगी। इसके लिए बाजार स्तर पर पोस्टर अभियान, सोशल मीडिया प्रचार और व्यापारिक संगठनों की सहभागिता की रणनीति तैयार की गई है।
अहिल्या चेम्बर्स के अध्यक्ष रमेश अग्रवाल और महामंत्री गोपाल दास अग्रवाल ने प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों से भी आंदोलन में सहभागिता की अपील की है। संगठन के अनुसार इसके बाद अलग-अलग शहरों के व्यापारिक संगठनों से समर्थन और सहभागिता का सिलसिला शुरू हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई देश की महत्वपूर्ण डिजिटल भुगतान व्यवस्था बन चुकी है। ऐसे में व्यापारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत डालने से पहले इसके आर्थिक प्रभाव, छोटे एवं मध्यम व्यापारियों की स्थिति और उपभोक्ताओं पर संभावित असर का व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए।
अहिल्या चेम्बर्स का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यापारियों पर प्रस्तावित अतिरिक्त लागत को लेकर आपत्ति दर्ज कराना और सरकार तक सामूहिक रूप से अपनी बात पहुंचाना है।