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New Delhi, May 2026 — Raising serious concerns...
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जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की उनको भाजपा में लाया कौन था? उनका तारणहार कौन बना था? जवाब शिवराज ही है। शिवराज ने मोदी की बहीखाते मे नम्बर बड़ा लिए है लेकिन अभी भी अमित शाह के दरबार मे कैलाश-नरोत्तम का जलवा है। शिवराज मुख्यमंत्री तो बनना चाहते है पर इस बार सारे विरोधियों को ठिकाने लगाकर। उनकी किस्मत भी अच्छी है जो विधायक बेटे के बल्ला कांड के कारण कैलाश विजयवर्गीय को बैकफुट पर आना पड़ा। नरोत्तम और गोपाल भार्गव को उन्होंने कल विधानसभा में निपटा दिया। कसमसाए नरोत्तम को जब असली कहानी पता लगी तो वे भनभनाते हुए शिवराज के घर से निकल आए और विंडो ड्रेसिंग करते हुए कहा दिया”शुरू उन्होंने किया है,खत्म हम करेंगे”।
गोपाल भार्गव को बड़बोलापन ले डूबा। सुबह 1-2 कर रहे थे शाम को जमीन पर नजर आए।
इधर कमलनाथ भी दिग्गी-महाराज की ब्लैकमेलिंग,सपा-बसपा के दबाब से परेशान थे। दिग्गी ने व्यापक का राग अलापा तो कमलनाथ-शिवराज को मौका मिल गया। तुम मुझे बचाओ मैं तुम्हारी सरकार बचाऊंगा, का समझौता परिणित हो गया।
दोनो विधायक कांग्रेस मूल के है,दोनो को शिवराज लाए,दोनो के भाजपा में संरक्षक शिवराज ही थे।
सवाल लाजमी है कि कमलनाथ से शिवराज ने हाथ क्यो मिलाया?.
थोड़ा गहराई में जाएंगे तो पता चलेगा कि यह दोस्ती काफी पुरानी है।
अपने मुख्यमंत्रीतत्व काल मे शायद ही कमलनाथ का कोई काम रुका हो। उनके हिसाब से अधिकारियों की छिंदवाड़ा में पदस्थापना होती रही है। वो तो अमित शाह के कमलनाथ-सिंधिया और कांतिलाल भूरिया को
टारगेट करने के बाद ही कमलनाथ के क्षेत्र में न्यूसेंस फैला वरना कमलनाथ का राज तो चल ही रह था।
विधानसभा में शक्ति परीक्षण कर कमलनाथ ने भी दिग्गी राजा और सिंधिया को आईना दिखा दिया है। सपा-बसपा के दबाव की हवा निकाल दी है और मंत्रियों को हद में रहने की नसीहत भी दे दी है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार मोदी कमलनाथ सरकार को गिराने के पक्ष में नही है। उनकी भी कमलनाथ से निकटता जगज़ाहिर है। आज तक मोदी ने कभी छिंदवाड़ा मे चुनावी सभा नही की।
बहरहाल मोदी से दोस्ती, शिवराज से समझौता कर कांग्रेस के आला नेताओ को आईना दिखाकर कमलनाथ ने सरकार तो बचा ली पर सरकार का इक़बाल कायम करना अब उनके लिए चुनोती है।
प्रकाश त्रिवेदी