डॉक्टर प्रियंका रेड्डी गैंगरेप मर्डर केस विशेष - Samacharline.com

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डॉक्टर प्रियंका रेड्डी गैंगरेप मर्डर केस विशेष

एनकाउंटर – डॉक्टर प्रियंका रेड्डी गैंगरेप मर्डर केस विशेष

शीतल न हुए थे अभी,
अंगारे आक्रोश के।
चीख रहे थे स्वर सभी,
फांसी के उदघोष के।
मोमबत्तियां भी अभी,
और जलने को आतुर थीं।
चैनलों की बहसें भी,
टीआरपी को व्याकुल थीं।

एनकाउंटर की आई खबर,
पंख लगाकर इतने में।
जाबांजी के इस अंदाज का तुम,
मोल लगाओगे कितने में।
फैसले होते जल्दी ही,
अगर भारत के कानून से।
होली न खेली जाती आज,
दरिंदों के गंदे खून से।

दर्द कुछ तो कम होंगे,
उस बेटी के घरवालों के।
जूते पहनो अब सभी,
इन कुत्तों की खालों के।
ये वतन है अब नया,
जहां है सब कुछ बदला सा।
रोशन है सूरज भी,
जहां अब ज्यादा उजला सा।

ताले लगा दो हे सरकार,
शराब-नशे के सब ठेकों पर।
कुछ तो होंगे अपराध कम,
उपकार करो अनेकों पर।
मैं ये नहीं कहता,कि एनकाउंटर असली है या फर्जी है।
पर जो भी है,इसमें खुद उस रब की मर्ज़ी है।

न ताको किसी बेटी को,
तुम गिद्धों की नजरों से।
तुम्हारी बेटी भी रहेगी महफूज़,
औरों की गंदी नज़रों से।
या तो हर बेटी को,
यहां सर रखकर पूजा जायेगा।
या हर वहशी दरिंदा ऐसा,
तपती भट्टी में भूना जायेगा।

सादर स्वरचित-

सुणीत सिज़रिया
भोपाल मध्यप्रदेश
sizariya@gmail.Com