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योजना के मुताबिक वेदांता ग्रुप की कंपनी ट्विन स्टार (Twin Star Technologies) 90 दिनों के भीतर करीब 500 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान करेगी और बाकी धनराशि का भुगतान कुछ समय के भीतर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के रूप में करेगी.

दिवालियापन मामलों की अदालत नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने मुश्किल में चल रही करीब 35 साल पुरानी कंपनी वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज (Videocon Industries) की बिक्री योजना पर मुहर लगा दी है. अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज इसे करीब 2,962 करोड़ रुपये में खरीदेगी.

वीडियोकॉन समूह पर करीब 31,000 करोड़ रुपये का कर्ज भी है. योजना के मुताबिक वेदांता ग्रुप की कंपनी ट्विन स्टार (Twin Star Technologies) 90 दिनों के भीतर करीब 500 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान करेगी और बाकी धनराशि का भुगतान कुछ समय के भीतर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के रूप में करेगी.

शाॅपिंग पर निकले अग्रवाल

लेनदेन पूरा होने पर इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स और फेरो अलॉयज कॉर्पोरेशन के बाद इंडियन बैंकरप्सी कोड के तहत अनिल अग्रवाल की यह तीसरी संपत्ति खरीद होगी.

वीडियोकॉन की की रावा तेल क्षेत्र में 25 फीसदी हिस्सेदरी होने की वजह से वेदांता ने ग्रुप की कंपनियों में रुचि दिखाई है. इस अधिग्रहण के बाद वेदांता की रावा तेल क्षेत्र में 47.5 फीसदी हिस्सेदारी हो जाएगी. इसके साथ वह ओएनजीसी की 40 फीसदी हिस्सेदारी से भी बड़ी हिस्सेदार हो जाएगी.

राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की दो सदस्यीय मुंबई पीठ ने ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज की प्रस्ताव योजना को मंजूरी दे दी. पीठ में एच पी चतुर्वेदी और रविकुमार दुरईसामी शामिल थे.

1986 में हुई थी वीडियोकॉन की शुरुआत

सितंबर 1986 में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज की शुरुआत हुई थी. इसके बाद यह भारत की पहली कंपनी बनी जिसे रंगीन टीवी बनाने का लाइसेंस मिला. साल 1990 में कंपनी ने अपने पोर्टफोलिया का विस्तार किया और एसी, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजेरेटर्स बनाने लगी.

साल 2020 में ग्रुप ने ऑयल एंड गैस, टेलीकॉम, रिटेल और डीटीएच टीवी में कदम रखा. इन प्रोजेक्ट्स के लिए कंपनी ने उधार लिया और उस पर ब्याज का बोझ बढ़ता गया.