पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन के साथ देवभूमि ने किया शिवभक्त कांवड़ियों का अभिनंदन -मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
हरिद्वार- धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के...
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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली...
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार...
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महाराष्ट्र सरकार में अंतिम बाधा को भी पार कर चुके मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब खुलकर बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पार्टी प्रमुख और तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे का बर्ताव उनके साथ ठीक नहीं था। साथ ही शिंदे ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने भाजपा के साथ सरकार बनाने के लिए कम से कम पांच बार कोशिश की थी। सोमवार को हुए फ्लोर टेस्ट में विपक्ष के 99 मतों के मुकाबले 164 विधायकों का समर्थन हासिल कर शिंदे सरकार ने विश्वास मत जीता।
निशाना बनाने के लगे आरोप
सदन में विश्वास मत जीतने के बाद उन्होंने कहा, ‘मुझे दबाया जा रहा था। मुझे निशाना बनाया जा रहा था। जब मैं मंत्री था तो मेरे विभाग में दखल दिया जाता था… मुझे बालासाहब ठाकरे और आनंद दीघे दोनों ने अन्याय सहन नहीं करना सिखाया है। एमएलसी चुनाव के बाद मैं गया और कॉल करना शुरू किया।’
उन्होंने आरोप लगाए, ‘राज्यसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी का बर्ताव और खराब हो गया था।’ इस दौरान उन्होंने MVA सरकार में सीएम उम्मीदवारी पर भी चर्चा की। शिंदे ने कहा, ‘MVA सरकार के गठन के समय सीएम पद के लिए मेरे नाम की चर्चा थी। हालांकि, मुझे बताया गया कि शरद पवार उद्धव ठाकरे को सीएम बनाना चाहते हैं। मुझे अजित पवार की तरफ से बताया गया कि एनसीपी ने सीएम पद के लिए मेरे नाम का विरोध नहीं किया था और शिवसेना में ही विरोध था।’
कर लिया था फैसला
सीएम ने कहा कि उन्होंने बगावत के समय ठान लिया था कि कदम पीछे नहीं लेंगे। शिंदे ने कहा, ‘शिवसेना सुप्रीमो बालासाहब ठाकरे ने कहा था कि वह कभी भी कांग्रेस और एनसीपी में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वह उन्हें दुश्मन समझते थे।’ उन्होंने कहा है कि विधानसभा चुनाव में उनके गठबंधन का लक्ष्य 200 सीटें जीतने पर होगा।