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भारत-चीन के बीच हुई 17वें दौर की सैन्य वार्ता को विदेश मंत्रालय ने रचनात्मक बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि दोनों पक्षों ने पश्चिमी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सटे क्षेत्रों में प्रासंगिक मुद्दों के समाधान पर खुले और रचनात्मक तरीके से विचारों का आदान-प्रदान किया।
यह पूछे जाने पर कि क्या इस वार्ता के दौरान तवांग के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, बागची ने कहा कि वार्ता को लेकर संयुक्त बयान जारी किया गया है। इससे ज्यादा जानकारी इस समय उनके पास उपलब्ध नहीं है। तवांग के मुद्दे पर पूछे गए अन्य प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री इस बारे में संसद में बयान दे चुके हैं। उसमें जोड़ने के लिए और कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
हाल में अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई तनातनी के बावजूद भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर 17वें दौर की सैन्य वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य कमांडरों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा की और पारस्पारिक रूप से स्वीकार्य सैन्य समाधान निकालने की बात कही।
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की 17वें दौर की बैठक 20 दिसंबर को चीन की ओर चुशुल-मोल्दो सीमा मीटिंग प्वाइंट पर आयोजित की गई थी। यह बैठक करीब साढ़े पांच महीने के बाद आयोजित हुई है क्योंकि पिछली बैठक 17 जुलाई को हुई थी।
बयान में कहा गया है कि इस दौरान पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति के आधार पर दोनों पक्षों ने खुले तथा रचनात्मक तरीके से पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के प्रासंगिक मुद्दों के समाधान पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने जल्द से जल्द शेष विषयों के समाधान के उद्देश्य से काम करने के लिए दोनों देशों के नेताओं द्वारा दिए गए मार्ग निर्देशन के अनुरूप खुली और गहन चर्चा की, जो पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बहाल करने में सहायक होगी और द्वपक्षीय संबंधों में प्रगति को सक्षम करेगी।
बयान के अनुसार इस बीच, दोनों पक्ष पश्चिमी क्षेत्र में जमीन पर सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने निकट संपर्क में रहने तथा सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से बातचीत करने तथा शीघ्र शेष विषयों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर सहमति व्यक्त की।
बता दें कि पूर्वी लद्धाख में जून 2020 में गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद तनाव उत्पन्न हो गया था और कई स्थानों पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हो गए थे। हालांकि पेंगोग लेक समेत कई स्थानों से सैनिक हटे हैं। लेकिन अभी भी हाट स्प्रिंग्स, डेप्साग तथा डेमचौक क्षेत्रों में टकराव कायम है। भारत लगातार चीन से मांग कर रहा है कि वह एलएसी पर मई 2020 से पहले की स्थिति बहार करे।