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मध्य प्रदेश

स्वास्थ्य विभाग का लेखापाल अपने ही विभाग के अधिकारी से रिश्वत लेते धराया, 45 हजार रुपये किए गए बरामद

सार

Khargone News: स्वास्थ्य विभाग का लेखापाल अपने ही विभाग के एक अधिकारी से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। लेखापाल के पास से 45 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।

विस्तार

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले की झिरनिया तहसील में रिश्वत के लेनदेन का एक अनोखा मामला ट्रैप हुआ है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के लेखापाल द्वारा अपने ही विभाग के एक अधिकारी से उनके अवकाश के दौरान के रुके हुए वेतन और अन्य भुगतान को लेकर करीब 56 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी। इसमें से अधिकारी द्वारा पांच हजार रुपए दिए भी जा चुके थे। जिसके बाद लोकायुक्त को शिकायत करने पर 45 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए लेखापाल को बुधवार को ट्रैप किया गया।

खरगोन जिले की झिरनिया तहसील के बड़ी स्थित उप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को लोकायुक्त इंदौर के ट्रैप दल द्वारा एक रिश्वतखोर बाबू पर कार्रवाई की गई। दरअसल इसी उप स्वास्थ्य केंद्र के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी निकेश कनाड़े की पत्नी का कुछ दिन पूर्व देहांत हो गया था, जिसके चलते वे दो माह से अवकाश पर थे। इसी बीच उनके दो माह के वेतन का भुगतान एवं अन्य देयस्वत्व को बीएमओ कार्यालय झिरनिया द्वारा रोक दिया गया था। अपने रुके हुए वेतन सहित अन्य भुगतान जो की लगभग 1,33,000/- था को निकालने के एवज में निकेश कनाड़े से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झिरनिया में पदस्थ लेखापाल आनंद कनेल द्वारा 56,000 रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी, जिसके बाद 45 हजार रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए आरोपी आंनद कनेल को ट्रैप किया गया। आरोपी द्वारा रिश्वत राशि पास ही स्थित एक फर्म शक्ति मशीनरी स्टोर्स में देने का कहा गया था, जिसके बाद ट्रैप दल द्वारा यह राशि वहां से एक प्राइवेट व्यक्ति शिवराज यादव से जब्त की गई और आरोपी लेखापाल के विरुद्ध धारा 7, भ्रष्टचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
इधर, इस मामले में शिकायतकर्ता निकेश कनाड़े ने बताया कि वे सामुदायिक उप स्वास्थ्य केंद्र बड़ी में सीएचओ के पद पर पदस्थ हैं और लेखापाल आनंद कनेल के द्वारा उनका दो महीने का वेतन रोका गया था और इसके साथ ही उनका जो दो महीने का इंसेंटिव था वह भी, जो कि वेतन के साथ कुल मिलाकर राशि एक लाख 33 हजार रुपये होती है। उसके एवज में लेखापाल आनंद कनेल ने उनसे 56 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी और वे रिश्वत देना नहीं चाहते थे। जिसके बाद उन्होंने लोकायुक्त में आवेदन दिया और उन्हें कहा गया कि वे कार्रवाई करेंगे। इसके बाद लोकायुक्त के द्वारा बुधवार को कार्रवाई की गई और उन्होंने मुझसे 45 हजार रुपए नगद लिए थे।

वहीं, इस पूरे मामले में कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त टीम के अधिकारी डीएसपी प्रवीण बघेल ने बताया कि यह लोकायुक्त इंदौर की ट्रेप कार्रवाई की गई है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झिरनिया में है। वहां लेखापाल आनंद कनेल पदस्थ हैं। इनके द्वारा इन्हीं के जो सीएचओ हैं, जो कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी निकेश कनाड़े हैं, इनका दो महीने का वेतन रुका हुआ था और कुछ इनको जो इंसेंटिव मिलते हैं, उसकी राशि लगभग 90,000 थी। ऐसा सब मिलाकर लगभग 1,33,000 के आसपास की कुल राशि थी। जिसको निकालने के एवज में इनसे 56000 रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी, जिसकी शिकायत उनके द्वारा पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त इंदौर को की गई थी और शिकायत का सत्यापन करने पर रिश्वत मांगा जाना सही पाया गया था। उसी के चलते ट्रैप दल का गठन किया गया था और अभी लेखापाल आनंद कनेल को 45,000 रुपये की रिश्वत राशि लेते हुए ट्रेप किया गया है और 5000 रुपये बातचीत के दौरान उनके द्वारा पहले ही ले लिए गए थे, जो रिश्वत राशि है, वह उनके द्वारा यहां एक दुकान के संचालक हैं उनको देने का कहा गया था। तो उनके यहां से यह रिश्वत राशि बरामद हुई है। इसलिए उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है, और इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।