गुफा मासेर की पहाड़ी पर स्थित सिद्ध आश्रम में भजन-संकीर्तन के बीच हुआ आयोजन, संतों की तपोभूमि में निर्धन कन्याओं का विवाह, समाज ने संभाली व्यवस्था - Samacharline.com

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गुफा मासेर की पहाड़ी पर स्थित सिद्ध आश्रम में भजन-संकीर्तन के बीच हुआ आयोजन, संतों की तपोभूमि में निर्धन कन्याओं का विवाह, समाज ने संभाली व्यवस्था

गंजबासौदा (ओमप्रकाश चौरसिया)। शहर से करीब 25 किमी दूर ग्राम गुफा मासेर की पहाड़ी पर स्थित सिद्ध संतों की तपोभूमि गुरुवार को अनोखे सामाजिक आयोजन की साक्षी बनी। यहां संतों के सान्निध्य में भजन-संकीर्तन, वैदिक मंत्रों के बीच निर्धन परिवार की कन्या का विवाह कराया गया। करीब 500 से 700 वर्ष पुरानी इस तपस्थली पर वर्षों से अखंड श्री सीताराम नाम संकीर्तन की परंपरा चली आ रही है। गुरुवार को इसी माहौल में शहनाई, मंगल गीत गूंजे। मंडप के नीचे सात फेरे हुए। आश्रम भक्ति, उल्लास से भर उठा। विवाह की खास बात रही कि दहेज से लेकर भोजन, पकवान, स्वागत-सत्कार, बारातियों की सेवा तक की पूरी व्यवस्था संतों की देखरेख में समाज ने मिलकर संभाली। क्षेत्र के जनपद सदस्य प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह रघुवंशी, गंगाराम कुशवाह, अन्नू यादव, राजू विश्वकर्मा, रिंकू रघुवंशी, जीवन पाल सहित कई ग्रामीण दिनभर सेवा में जुटे रहे।

बारात पहुंची संतों के चरणों में

ग्राम सतपाड़ा कला से परशुराम कुशवाह के पुत्र अरुण कुशवाह की बारात बैंड-बाजों के साथ आश्रम पहुंची। दूल्हे ने पहले गुरु गादी परंपरा के सिद्ध संतों को प्रणाम किया। महंत पूज्य हनुमान दास जी से आशीर्वाद लिया। इसके बाद सतपाड़ा कला निवासी शिवनारायण कुशवाह की अ पुत्री राखी कुशवाह के साथ स वैदिक रीति से विवाह संस्कार संपन्न हुआ।

भावुक हुए दोनों परिवार

रस्में पूरी होने के बाद वर-वधू के माता-पिता भावुक हो गए। उन्होंने कहा, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बच्चों का विवाह इतनी पवित्र संत भूमि में, इतने सम्मान के साथ होगा। आसपास के गांवों की महिलाएं भी बेटी के पांव पखारने की परंपरा ल निभाने कई किलोमीटर पैदल चलकर आश्रम पहुंचीं। विदाई के समय कई स ग्रामीणों की आंखें नम हो गई। आयोजन ने श्रद्धा, सेवा, सामाजिक सहयोग का संदेश दिया।