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पंपों पर बढ़ा दबाव, भविष्य के संकट के डर से किसान स्टॉक कर रहे डीजल, एडवांस पेमेंट के बाद भी 2-3 दिन में मिल रहा डीजल का टैंकर, सीजन से पहले दोगुनी हुई मांग

गंजबासौदा (विदिशा) ओपी चौरसिया। वैश्विक स्तर पर तेल को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का असर अब स्थानीय बाजार में भी दिखाई देने लगा है। गंजबासौदा क्षेत्र में डीजल की मांग अचानक बढ़ गई है। हालात यह है कि एडवांस भुगतान करने के बाद भी पेट्रोल पंप संचालकों को कंपनियों से दो से तीन दिन बाद टैंकर मिल रहा है। पहले भुगतान होते ही उसी दिन टैंकर जारी कर दिया जाता था। अब देरी से आपूर्ति होने के कारण पंप संचालकों और किसानों, दोनों की चिंता बढ़ गई है।

पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में इन दिनों डीजल की मांग लगभग दोगुनी हो गई है। सीजन शुरू होने से पहले ही किसान बड़ी मात्रा में डीजल खरीदकर स्टॉक कर रहे हैं। इसका कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्ष और संभावित तेल संकट की आशंका बताया जा रहा है। नगर में 14 पेट्रोल पंप हैं। आसपास के क्षेत्र की मिलाकर इनकी संख्या करीब 28 है। सामान्य दिनों में एक पंप पर प्रतिदिन 1500 से 2000 लीटर तक डीजल की बिक्री होती है।

कृषि सीजन के दौरान यह खपत बढ़कर लगभग 4000 लीटर तक पहुंच जाती है। पंप संचालकों का कहना है कि इस बार स्थिति अलग है। आमतौर पर तनी मांग मई-जून के दौरान आती थी। इस बार सीजन शुरू होने से पहले ही क्री दोगुनी हो गई है। इससे पंप संचालकों पर भी दबाव बढ़ गया है। उन्हें चयमित ग्राहकों को भी नाराज नहीं करना । किसानों की जरूरत भी पूरी करनी है।

एडवांस पेमेंट के बाद भी इंतजार डीजल पेट्रोल

पंप यूनियन के अध्यक्ष मुकेश सिंह राजपूत के अनुसार कंपनियों की ओर से किसी तरह के तेल संकट की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। पहले एडवांस भुगतान करते ही उसी दिन टैंकर मिल जाता था। अब भुगतान के बाद दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि अभी खरीफ सीजन शुरू होने में करीब डेढ़ महीने से अधिक का समय बाकी है। इसके बावजूद डीजल को लेकर किसानों की मांग बढ़ गई है। पंपों पर डीजल की खपत दोगुनी हो चुकी है।

किसान नेताओं ने जताई चिंता

भारतीय किसान संघ के नेताओं कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि देश में रसोई गैस और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। यदि ऐसा है तो कंपनियों द्वारा आपूर्ति में देरी क्यों हो रही है। इसका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। किसान नेताओं का कहना है कि खेती किसानों की आजीविका का मुख्य साधन है। यदि ईंधन की कमी हुई तो खेतों की तैयारी और सिंचाई, दोनों प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले भी खाद संकट का सामना कर चुके हैं। इसलिए इस बार वे पहले से ही सतर्क होकर डीजल का इंतजाम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में तेल की उपलब्धता और कीमत, दोनों पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

किसान पहले से कर रहे स्टॉक

किसानों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में वे खेतों में खड़ी या कटी फसल की चिंता छोड़कर डीजल का इंतजाम करने में जुट गए हैं। कई किसान जरूरत से डेढ़ से दो गुना अधिक डीजल खरीदकर सुरक्षित रख रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि भविष्य में डीजल की कमी हुई तो खरीफ फसल की तैयारी और बोवनी, दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इससे खेत खाली रह जाने का खतरा भी बढ़ जाएगा।