यूपी में BJP का है जमाना तो सपा क्यों बन रही दलबदलुओं का सियासी ठिकाना?
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे...
उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दल अपने सियासी-सामाजिक समीकरण दुरुस्त करने में जुटे...
विदेशी संस्थाओं द्वारा भारत में लोकतांत्रिक स्थिति की आलोचना की गई है,...
फरवरी महीने में थोक मूल्य आधारित सूचकांक (WPI) बढ़कर 4.17 फीसदी पर...
बंगाल की चुनावी रेस में बीजेपी और टीएमसी एक दूसरे से एक...

AI- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्किल्ड हुए बिना भविष्य में सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी मिलना मुश्किल होगा – वरिष्ठ पत्रकार, सरमन नगेले
Bharat Sarkar- भारत सरकार को AI- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा, स्वास्थ पर फोकस करना होगा – आईआईपीए में विशेषज्ञों ने कहा
भोपाल : 23, मार्च, 2026। राजनैतिक दलों और नेताओं की चुनाव जीतने की शॉर्ट टर्म नीति चिंतनीय और विचारणीय विषय है। यह बात भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ.पी. रावत ने कही। भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा द्वारा मध्यप्रदेश प्रशासन अकादमी भोपाल में सामयिक मुद्दा केंद्रीय एवं राज्य बजट 2026 – 2027 विषय पर आयोजित विमर्श के दौरान कहा कि भारत में यह देखने में आ रहा है कि राजनीतिक दल और राजनेता शॉर्ट टर्न नीति अपनाकर चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं जबकि वह बजट में रिफ्लेक्ट नहीं होती है। यह प्रैक्टिस बिल्कुल भी जनहितकारी नहीं है।
राजनीतिक दलों को नेताओं को और समाज के सभी तबकों को इस पर विचार करना चाहिए।
रावत ने कहा कि देश में बहुत तेज़ी के साथ जॉब गारंटीड डिग्री दी जा रही हैं, जो कि बिल्कुल भी सही नहीं है इसके कई कारण हैं । इससे जुड़े अंश भी बजट में रिफ्लेक्ट नहीं होते हैं । डिग्री मिलने के बाद लोग नौकरी का क्लेम करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों और प्राइवेट इंस्टीट्यूशन को इस पर विशेष गौर करने की जरूरत है।यह समाज के समक्ष चिंतनीय और विचारणीय विषय है।
विषय प्रवर्तन आई आई पी ए के चेयरमैन और संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे रिटार्ड आईएएस अधिकारी के.के. सेठी ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार और डिजिटल मीडिया के जानकार सरमन नगेले ने अपनी बात रखते हुए कहा की केंद्र सरकार ने बजट में आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सुविधा के लिए 300 करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किया गया। भारत में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदात्ता को 2047 तक टैक्स हॉलीडे दिए जाने का बजट में उल्लेख है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन, डेटा सेंटर के निर्माण, एक बहु-भाषी एआई उपकरण के रूप में भारत-विस्तार कृषि पोर्टलों के अलावा अन्य डिजिटल सेक्टर के कार्यों के लिए किये गए बजट प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया की केंद्र सरकार और राज्य की मध्यप्रदेश सरकार ने एआई के लिए रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन लिए इस बार के बजट में कोई प्रभावी प्रावधान नहीं किये हैं, हो सकता है कि आने वाले अगले वित्तीय वर्ष में बेहतर बजट प्रावधान किये जाएं ।
नगेले ने बताया की हाल ही में 16 से 21 फरवरी 2026 तक, नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन हुआ। AI समित ने वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। इस बात की पूरी संभावना है की केंद्र और राज्य सरकार ने समिट में ऐतिहासिक वैश्विक घोषणापत्र, एआई में निवेश के लिए प्रमुख प्रतिबद्धताएं आने, इनोवेशन के साथ नए विचार आने के पश्चात उसका अध्ययन करने के उपरांत बजट और भविष्य के लिए AI के क्षेत्र में किस तरह की रणनीति बनाना हो ऐसा लक्ष्य रखा हो।
नगेले ने बताया इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह का कहना है की केंद्र सरकार शीघ्र ही AI के बेसिक कोर्स आईटीआई और पॉलिटेक्निक के साथ-साथ तमाम इंस्टीट्यूशन के माध्यम से कराना प्रारंभ करने जा रही है । जिससे कि भारत का युवा एआई स्किल्ड बन सके और उनको अधिक से अधिक जॉब मिल सके।
नगेले ने कहा कि AI- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्किल्ड हुए बिना भविष्य में सरकारी और निजी क्षेत्र में नौकरी मिलना मुश्किल होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया की जिस तरह बिना टाइपिंग, कंप्यूटर के बेसिक सर्टिफिकेशन कोर्स किये बिना नौकरी नहीं मिलती थी वैसा ही इस AI के दौर में होगा इसकी पूरी संभावना है।
विमर्श के दौरान वक्ताओं ने कहा भारत सरकार को टेक्नोलॉजी इनोवेशन, शिक्षा, स्वास्थ, अकादमिक और रिसर्च के क्षेत्र में में विशेष फोकस करना चाहिए । देश और प्रदेश में निरंतर हो रहे विकास, अधोसंरचना, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, स्टार्टअप, एमएसएमई, आईआईटी, विद्यार्थियों के विश्वविद्यालयीन स्तर की शिक्षा के लिए किये गए बजट प्रावधान और बजट के उपयोग पर चर्चा की गई।साथ फ्री बीज की योजनाओं के कारण राज्यों के विकास पर पढ़ने वाले प्रभाव पर भी संवाद हुआ।
विमर्श में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव, एससी बेहार , मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी, एससी त्रिपाठी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट (IIFM), भोपाल के पूर्व निदेशक, डॉ. राम प्रसाद, पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, नरेंद्र प्रसाद, डी.पी. तिवारी, के.सी. श्रीवास्तव, अमोद कुमार गुप्ता, एस सी तिवारी, विवेक गुप्ता,एच, एन, मिश्रा, प्रोफ़ेसर धनंजय वर्मा, समेत अनेक पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने – अपने विचार साझा किये।