- वैल्यू एडिशन, विस्कोस फायबर, भैरवगढ़ बाटिक और नए बाजारों के सहारे टेक्सटाईल क्षेत्र में बनेगी नई पहचान, 2030 तक पांच हजार करोड़ निर्यात का टारगेट
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन अब टेक्सटाइल निर्यात के क्षेत्र में नई छलांग की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार की ‘100 चैंपियन डिस्ट्रिक्ट्स’ पहल के तहत तैयार जिला निर्यात कार्ययोजना (डीईएपी) में उज्जैन को कच्चे विस्कोस रेयान फाइबर के निर्यातक से आगे बढ़ाकर तैयार कपड़ों, परिधानों और उच्च मूल्य वाले टेक्सटाइल उत्पादों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीति बनाई गई है। कार्ययोजना में फाइबर से फैब्रिक और फैब्रिक से गारमेंट तक की संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया है, जिससे टेक्सटाइल निर्यात मूल्य में तीन से पांच गुना तक वृद्धि की संभावना जताई गई है।
उज्जैन निर्यात के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच जिले से 243.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,096 करोड़ रुपये) का कुल निर्यात दर्ज किया गया है, जो वित्त वर्ष 2024 के 64.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 556 करोड़ रुपये) के आधार स्तर से लगभग 3.8 गुना अधिक है। वर्तमान में जिले से 222 उत्पाद 107 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
जिले के कुल निर्यात में टेक्सटाइल क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। टेक्सटाइल निर्यात 73.36 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 631 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुका है, जिससे उज्जैन मध्यप्रदेश का चौथा सबसे बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक जिला बन गया है। कार्ययोजना के तहत वर्ष 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ाकर 146 से 193 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1,256 से 1,660 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि जिले का समग्र निर्यात लक्ष्य 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 4,300 करोड़ रुपये) निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार स्थानीय उत्पादों में वैल्यू एडिशन, रोजगार सृजन और निर्यात आधारित औद्योगिक विकास पर जोर देते रहे हैं। उज्जैन के लिए तैयार जिला निर्यात कार्ययोजना इसी सोच को आगे बढ़ाती दिखाई देती है, जिसमें कच्चे फाइबर के निर्यात से आगे बढ़कर तैयार वस्त्र, टेक्निकल टेक्सटाइल, जीआई टैग प्राप्त भैरवगढ़ बाटिक और वैश्विक बाजारों पर विशेष फोकस किया गया है। कलेक्टर श्री रौशन सिंह के नेतृत्व में जिला प्रोत्साहन समिति, जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों, उद्योग संगठनों और निर्यातकों के समन्वय से एमपीआईडीसी उज्जैन के द्वारा तैयार इस रोडमैप में टेक्सटाइल क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। कार्ययोजना में उद्योग, रोजगार, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और निर्यात वृद्धि को एक साथ जोड़ते हुए उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर के टेक्सटाइल एवं निर्यात हब के रूप में विकसित करने की दिशा तय की गई है।
- चार उत्पादों पर टिका निर्यात, वैल्यू एडिशन में सबसे बड़ा मौका
कार्ययोजना के अनुसार उज्जैन के टेक्सटाइल निर्यात की लगभग पूरी संरचना चार प्रमुख उत्पादों पर आधारित है। इनमें सबसे बड़ा उत्पाद विस्कोस रेयान स्टेपल फाइबर (वीएसएफ) है, जिसका निर्यात 43.80 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 377 करोड़ रुपये) है और यह कुल टेक्सटाइल निर्यात का लगभग 60 प्रतिशत है। अमेरिका, तुर्की, नेपाल और चीन सहित 34 देशों को निर्यात होने वाले इस उत्पाद में सबसे बड़ी संभावना वैल्यू एडिशन की मानी गई है। कार्ययोजना के अनुसार यदि वर्तमान कच्चे फाइबर निर्यात का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा भी जिले में फैब्रिक या निटेड वस्त्रों में परिवर्तित किया जाता है, तो 18 से 25 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 155 से 215 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त निर्यात हो सकेगा। वैश्विक विस्कोस रेयान बाजार भी 15 अरब डॉलर (करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर वर्ष 2030 तक 23 अरब डॉलर (करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है।
निटेड अपैरल जिले का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है। अंडरगारमेंट्स, कॉटन टी-शर्ट्स और बच्चों के वस्त्रों सहित इस श्रेणी का निर्यात 24.95 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 215 करोड़ रुपये) है, जो कुल टेक्सटाइल निर्यात का लगभग 34 प्रतिशत हिस्सा है। भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद इन उत्पादों पर ब्रिटेन में लगने वाला 12 प्रतिशत आयात शुल्क शून्य हो गया है, जिससे जिले के निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है। कार्ययोजना के अनुसार डब्ल्यूआरएपी सर्टिफिकेशन और ब्रिटेन, कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे नए बाजारों में विस्तार के जरिए यह निर्यात वर्ष 2030 तक 55 से 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 473 से 602 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। वैश्विक निटेड अपैरल बाजार भी 180 अरब डॉलर (करीब 15.48 लाख करोड़ रुपये) से बढ़कर 250 अरब डॉलर (करीब 21.50 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके अलावा एफआईबीसी (फ्लेक्सिबल इंटरमीडिएट बल्क कंटेनर्स) का निर्यात 2.91 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) है, जिसका प्रमुख बाजार यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय देश हैं। वहीं कच्चे कपास का निर्यात 1.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 12 करोड़ रुपये) है, जिसका प्रमुख गंतव्य बांग्लादेश है। कार्ययोजना में कच्चे कपास को घरेलू स्पिनिंग और मूल्य संवर्धित उत्पादन से जोड़ने पर भी बल दिया गया है।
कार्ययोजना के अनुसार वर्ष 2030 तक उज्जैन का टेक्सटाइल निर्यात वर्तमान 73.36 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 631 करोड़ रुपये) से बढ़कर 146 से 193 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1,256 से 1,660 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है। वहीं जिले का कुल निर्यात 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 4,300 करोड़ रुपये) तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें टेक्सटाइल के अलावा सोयाबीन ऑयल केक, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद और अन्य निर्यात क्षेत्रों का भी महत्वपूर्ण योगदान अपेक्षित है।
- भैरवगढ़ बाटिक को वैश्विक मंच
जिला निर्यात कार्ययोजना में जीआई टैग प्राप्त भैरवगढ़ बाटिक प्रिंट को विशेष फोकस उत्पाद के रूप में शामिल किया गया है। कार्ययोजना के तहत महाकाल की सांस्कृतिक पहचान और जीआई प्रतीक के साथ एकीकृत ब्रांडिंग, क्यूआर आधारित प्रामाणिकता सत्यापन तथा मानकीकृत पैकेजिंग विकसित की जाएगी, ताकि असली भैरवगढ़ बाटिक को मशीन निर्मित उत्पादों से अलग पहचान मिल सके। साथ ही महाकाल मंदिर, काल भैरव, सांदीपनि आश्रम और क्षिप्रा घाट जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर ‘जीआई क्राफ्ट कॉरिडोर’, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और हस्तशिल्प कियोस्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। ई-कॉमर्स, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और धार्मिक पर्यटन से जुड़ाव के जरिए इसे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है।
प्रमुख टेक्सटाइल निर्यातकः उज्जैन का एक्सपोर्ट इकोसिस्टम
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ग्रासिम इंडस्ट्रीज (बिरला सेलुलोज), नागदा- जिले के टेक्सटाइल निर्यात का सबसे बड़ा आधार। विस्कोस रेयान स्टेपल फाइबर के उत्पादन और निर्यात में अग्रणी। उज्जैन के कुल टेक्सटाइल निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इसी सेक्टर की है।
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बेस्ट लाइफस्टाइल अपैरल प्राइवेट लिमिटेड- निटवेयर और रेडीमेड गारमेंट निर्माण की प्रमुख इकाई। जिला निर्यात कार्ययोजना में इसे जिले के प्रमुख “चैंपियन प्रोडक्ट” निर्यातकों में शामिल किया गया है।
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प्रतिभा स्वराज प्राइवेट लिमिटेड- प्रमुख परिधान निर्माता कंपनी। जिले के रेडीमेड गारमेंट निर्यात को नई पहचान देने वाली इकाइयों में शामिल।
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भैरवगढ़ बाटिक आर्टिजन को-ऑपरेटिव क्लस्टर- भैरवगढ़ बाटिक आर्टिजन को-ऑपरेटिव क्लस्टर के माध्यम से हस्तनिर्मित साड़ियां, दुपट्टे और स्टोल तैयार किए जाते हैं। विशिष्ट वैक्स-रेजिस्ट डाइंग तकनीक और पारंपरिक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध इस कला को कार्ययोजना में विशेष स्थान दिया गया है।
उज्जैन की ताकत, जो बनाएगी टेक्सटाइल एक्सपोर्ट हब
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महाकाल की नगरी के रूप में देश-विदेश में विशिष्ट पहचान, हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं का आगमन।
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देश के प्रमुख विस्कोस रेयान उत्पादन केंद्रों में शामिल, 34 देशों को निर्यात।
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रेडीमेड गारमेंट और निटवेयर क्षेत्र की मजबूत इकाइयां, विशेषकर अमेरिकी बाजार में पहचान।
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जीआई टैग प्राप्त भैरवगढ़ बाटिक प्रिंट, वैश्विक ब्रांड बनने की क्षमता।
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मध्यप्रदेश का चौथा सबसे बड़ा टेक्सटाइल निर्यातक जिला।
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पिछले दो वर्षों में कुल निर्यात में लगभग 3.8 गुना वृद्धि।
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छह औद्योगिक क्षेत्र एवं प्रस्तावित मेडिकल डिवाइस पार्क से टेक्निकल और मेडिकल टेक्सटाइल की संभावनाएं।
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इंदौर-पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की निकटता, मजबूत रेल-सड़क संपर्क और 107 देशों तक पहुंचा निर्यात नेटवर्क।
एक्शन प्लान: ऐसे बढ़ेगा उज्जैन का टेक्सटाइल निर्यात
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वर्ष 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए चरणबद्ध रणनीति लागू की जाएगी।
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जिले में एकीकृत टेक्सटाइल पार्क और संपूर्ण टेक्सटाइल इकोसिस्टम विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
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स्थानीय उद्योगों और उद्यमियों के लिए नियमित एक्सपोर्ट अवेयरनेस वर्कशॉप तथा विशेषज्ञों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता प्रमाणन, वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के लिए उद्योगों को सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
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टेक्सटाइल क्षेत्र में महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाने और उनके लिए विश्वास निर्माण व कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
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नए देशों और बाजारों तक पहुंच बढ़ाकर निर्यात को अधिक विविध और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।
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उत्पाद गुणवत्ता, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और वैश्विक खरीदारों से संपर्क बढ़ाने के लिए विशेष पहल की जाएगी।
वर्सन
एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक श्री राजेश राठौड़ ने कहा कि जिला निर्यात कार्ययोजना के क्रियान्वयन के लिए चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से कार्य किया जाएगा। जिला प्रशासन, उद्योग विभाग, जिला प्रोत्साहन समिति, निर्यातकों तथा अन्य सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उज्जैन में उपलब्ध औद्योगिक क्षमता और निर्यात संभावनाओं का पूरा उपयोग करते हुए टेक्सटाइल क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

