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एक ही डंडे पर दो झंडे……. किसे मिलेगा डंडा और झंडा ? चर्चा का विषय बने एक डंडे पर दो झंडे

एक ही डंडे पर दो झंडे…….
किसे मिलेगा डंडा और झंडा ?
चर्चा का विषय बने एक डंडे पर दो झंडे
देवास।
चुनावी दौर में पार्टीयों के कैसे झंडे और पोस्टर लग रहे हैं, ये देखना भी किसी हास्यास्पद दृश्य से कम नहीं है। जहां देखें वहां पर कई डंडो पर दो अलग-अलग पार्टी के झंडे देखने को आसानी से मिल जाते हैं जहां कई प्रकार की चर्चा आम तौर पर सूनी व देखी जाती है। कुछ इसी प्रकार का एक मामला शहर के बीच देखने को मिला जहां डंडा एक है और उस दो पार्टीयों के झंडे लगे देखे गये हैं। किंतु यहां देखने वाली बात यह है की जहां पर उक्त झंडे लगाये गये हैं वे व्यावसायिक प्रतिष्ठान है। जहां दोनों ही पार्टीयों के समर्थक व्यापारी वर्ग दिखाई पड़ते हैं। परंतु यहां पर एक ही डंडे पर दो झंडे लगे होना ये दर्शाता है की उक्त व्यापारी भी सिर्फ एक पार्टी से संतुष्ट नहीं है इसलिये उसने दोनों ही पार्टीयों के झंडे एक ही डंडे पर लगा दिये हैं, ताकि कहीं ना कहीं उसे दोनों ही पार्टीयों के नेताओं से कुछ…..मिल सके।
चुनावी दौर में राजनीतिक गर्माहट कुछ इस कदर हो रही है कि व्यापारी वर्ग के साथ ही मतदाता भी नेताओं के लिए तनाव पैदा कर रहे हैं। वर्तमान चुनाव में जनसंपर्क अपने अंतिम पड़ाव पर है और मतदान के लिये भी सोच व विचार करने के लिये महज 5 दिन शेष बचे है। ऐसी परिस्थिति में किसे मतदाता अपना वोट देकर राजगद्दी पर बैठाती है ये मतदाता ने मन में ठान लिया है। किंतु उससे पहले असमंजस की स्थिति जब पैदा हुई जब स्थानीय एमजी रोड़ स्थित एक मोबाइल दुकान के बाहर रोड़ पर लगे एक
खंबे के ऊपर एक डंडे से बंधे झंडे जिसमें आस-पास कमल वह बीच में हाथ का पंजा लगाए झंडा चर्चा का विषय बना
हुवा है। लोगों के मुंह से यह भी सुना का है कि डंडा तो एक है पर झंडे अलग-अलग है। इसका मतलब तो यह निकलता है की एक ही नाव पर सवार दो लोग हैं जिसमें किसे धक्का लगेगा और कौन नाव से गहरे पानी में गिरेगा। वैसे कहा जाये तो यह तो 28 तारीख को होने वाले मतदान के बाद 11 दिसंबर को आने वाले परिणाम के बाद ही पता चलेगा की झंडा किसका था और डंडा किसका।