हिंदुत्व संकीर्ण नहीं, विश्व कल्याण की व्यापक दृष्टि : अशोक पांडेय, डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के दूसरे दिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व की वैश्विक दृष्टि पर मंथन - Samacharline.com
उज्जैनमध्य प्रदेशहोम

हिंदुत्व संकीर्ण नहीं, विश्व कल्याण की व्यापक दृष्टि : अशोक पांडेय, डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के दूसरे दिन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व की वैश्विक दृष्टि पर मंथन

उज्जैन। डॉ. हेडगेवार जन्म शताब्दी स्मृति सेवा न्यास के प्रकल्प अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला-2026 के दूसरे दिवस शनिवार को लोकमान्य तिलक विद्यालय, नीलगंगा रोड, माधव नगर में “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व” विषय पर विस्तृत व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य भारत प्रांत के मा. प्रांत संघचालक अशोक जी पांडेय रहे, सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुधीर गवारिकर ने की। बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक उपस्थित रहे।

अतिथियों का स्वागत डॉ. सुरेश बैंडवाल एवं चरणजीत सिंह कालरा ने किया,अतिथि परिचय आशीष नाटानी ने दिया। स्मृति चिन्ह पंकज चांदोरकर एवं राजेश पाटीदार द्वारा प्रदान किए गए। कार्यक्रम में व्यक्तिगत गीत की प्रस्तुति अंकित जैन ने दी तथा अंत में अभिषेक गोयल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन गौरीलाल परमार ने किया।

कार्यक्रम स्थल पर संघ की 100 वर्ष की यात्रा की प्रदर्शनी भी लगाई गई पोस्टर्स के माध्यम से संघ की यात्रा को आमजन के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

हिंदुत्व का मूल भाव अस्तित्व की एकता : अशोक पांडेय

अपने उद्बोधन में अशोक पांडेय ने कहा कि हिंदुत्व का मूल तत्व अस्तित्व की एकता और एकात्मता है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन समस्त सृष्टि में एक ही परम तत्व की उपस्थिति को स्वीकार करता है। प्राणी मात्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांड के कण-कण में परमात्मा का अंश विद्यमान है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन का यह भाव “सर्वे भवन्तु सुखिनः” में स्पष्ट दिखाई देता है, जहां केवल अपने नहीं, बल्कि समस्त विश्व के कल्याण की कामना की जाती है। यही दृष्टि आगे चलकर “वसुधैव कुटुम्बकम्” के रूप में प्रकट होती है।

विविधता में एकता हिंदुत्व की प्रमुख विशेषता

पांडेय ने कहा कि हिंदुत्व विविधताओं का सम्मान करना सिखाता है। भाषा, पूजा-पद्धति, परंपराएं और मत भिन्न हो सकते हैं, किंतु मूल तत्व एक ही है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि भारतीय चिंतन कभी संकीर्ण या कट्टर नहीं हो सकता। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस, गुरु नानक, जैन और बौद्ध दर्शन के उदाहरण देते हुए कहा कि सभी परंपराओं में विश्व कल्याण और समभाव की भावना निहित है। यह दृष्टि विरोध नहीं, बल्कि सहअस्तित्व का मार्ग दिखाती है।

सेवा, करुणा और समभाव हिंदुत्व का आधार

पांडेय ने कहा कि हिंदुत्व का आधार सेवा, करुणा, दया और त्याग है। उन्होंने कहा कि दूसरे की सहायता करना दान या अहसान नहीं, बल्कि परमात्मा की सृष्टि की सेवा है। इसी भावना के कारण भारतीय जीवनदृष्टि में प्रत्येक प्राणी के प्रति सद्भाव और करुणा का भाव रखा गया है।

जीवन की निरंतरता और कर्मफल का सिद्धांत

अपने व्याख्यान में पांडेय ने कहा कि हिंदू दर्शन की एक महत्वपूर्ण विशेषता निरंतरता और सातत्य है। मृत्यु को अंत नहीं माना गया, बल्कि आत्मा की यात्रा का एक पड़ाव माना गया है। उन्होंने कहा कि कर्म और उसके फल का सिद्धांत सामाजिक अनुशासन और नैतिक जीवन की व्यवस्था का आधार है।

समापन दिवस पर आलोक जी कुमार देंगे व्याख्यान

व्याख्यानमाला के समापन दिवस 12 अप्रैल, रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मा. सह सरकार्यवाह आलोक कुमार जी “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – नए क्षितिज” विषय पर व्याख्यान देंगे। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ सनदी लेखाकार अजय कुमार जैन करेंगे।

व्याख्यानमाला समिति के अध्यक्ष नितिन गरुड़ एवं सचिव गोपाल गुप्ता ने शहरवासियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।