मूंग-उड़द पर खतरा : सिंचाई, मल्चिंग और स्प्रे से नुकसान कम करने की अपील, लू का कहर: 40 डिग्री पारे से फसलें प्रभावित - Samacharline.com

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मूंग-उड़द पर खतरा : सिंचाई, मल्चिंग और स्प्रे से नुकसान कम करने की अपील, लू का कहर: 40 डिग्री पारे से फसलें प्रभावित

गंजबासौदा(ओपी चौरसिया)। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में बढ़ते तापमान और लू के असर ने रबी व ग्रीष्म कालीन फसलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क करते हुए समय पर प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है।

कृषि महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ. आराधना ने बताया कि 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता तापमान पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया को प्रभावित कर रहा है। अधिक गर्मी के कारण पौधों के रंध्र बंद हो जाते हैं। इससे कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कम होता है। वृद्धि रुक जाती है। श्वसन दर बढ़ने से ऊर्जा क्षति होती है। इसके कारण फूल और छोटे फल झड़ने लगते हैं। जिले में टमाटर,
मिर्च, खीरा, लौकी, मूंग और उड़द जैसी फसलें इस समय ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। खेतों में पत्तियों का मुरझाना, झुलसना और फल-फूल गिरना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करें। इससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी। खेत में भूसा या पॉलिथीन मल्च का उपयोग कर तापमान कम किया जा सकता है। 3 प्रतिशत का ओलिन और 0.5 प्रतिशत पोटाश के छिड़काव के साथ अमीनो एसिड या सीवीड एक्सट्रैक्ट का प्रयोग पौधों की सहन शीलता बढ़ाता है।

महाविद्यालय डीन डॉ. विनोद गर्ग के अनुसार दलहनी फसलों में हल्की सिंचाई और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव फलियों के विकास में सहायक है। कृषि वैज्ञानिकों ने दोपहर में सिंचाई से बचने, अत्यधिक नाइट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करने और संतुलित पोषण अपनाने की सलाह दी है। इससे फसलों को लू के असर से बचाकर उत्पादन में कमी को रोका जा सकें।